महाभारत 8.59.3
ततः कर्णरथं यान्तमरीन्घ्नन्तं धनंजयम्बाणवर्षैरभिघ्नन्तः संशप्तकरथा ययुः
tataḥ karṇarathaṃ yāntamarīnghnantaṃ dhanaṃjayambāṇavarṣairabhighnantaḥ saṃśaptakarathā yayuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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