महाभारत 8.59.43
ततः क्षणेन क्षितिपाः क्षतजप्रतिमेक्षणाःकर्णं ववर्षुर्बाणौघैर्यथा मेघा महीधरम्
tataḥ kṣaṇena kṣitipāḥ kṣatajapratimekṣaṇāḥkarṇaṃ vavarṣurbāṇaughairyathā meghā mahīdharam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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