महाभारत 9.2.30
भीष्मश्च निहतो यत्र लोकनाथः प्रतापवान्शिखण्डिनं समासाद्य मृगेन्द्र इव जम्बुकम्
bhīṣmaśca nihato yatra lokanāthaḥ pratāpavānśikhaṇḍinaṃ samāsādya mṛgendra iva jambukam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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