महाभारत 9.2.39
नानादेशसमावृत्ताः क्षत्रिया यत्र संजयनिहताः समरे सर्वे किमन्यद्भागधेयतः
nānādeśasamāvṛttāḥ kṣatriyā yatra saṃjayanihatāḥ samare sarve kimanyadbhāgadheyataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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