महाभारत 9.2.3
अहो बत महद्दुःखं यदहं पाण्डवान्रणेक्षेमिणश्चाव्ययांश्चैव त्वत्तः सूत शृणोमि वै
aho bata mahadduḥkhaṃ yadahaṃ pāṇḍavānraṇekṣemiṇaścāvyayāṃścaiva tvattaḥ sūta śṛṇomi vai
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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