महाभारत 9.2.44
न हि मेऽन्यद्भवेच्छ्रेयो वनाभ्युपगमादृतेइमामवस्थां प्राप्तस्य लूनपक्षस्य संजय
na hi me'nyadbhavecchreyo vanābhyupagamādṛteimāmavasthāṃ prāptasya lūnapakṣasya saṃjaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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