महाभारत 9.2.53
रणमूर्ध्नि हतो भीष्मः पश्यतां वः किरीटिनाएवमेव हतो द्रोणः सर्वेषामेव पश्यताम्
raṇamūrdhni hato bhīṣmaḥ paśyatāṃ vaḥ kirīṭināevameva hato droṇaḥ sarveṣāmeva paśyatām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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