महाभारत 9.20.20
अमृष्यमाणो धनुषश्छेदनं कृतवर्मणाकुपितोऽतिरथः शीघ्रं कृतवर्माणमभ्ययात्
amṛṣyamāṇo dhanuṣaśchedanaṃ kṛtavarmaṇākupito'tirathaḥ śīghraṃ kṛtavarmāṇamabhyayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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