महाभारत 9.20.23
रोषेण महताविष्टः शूलमुद्यम्य मारिषचिक्षेप भुजवेगेन जिघांसुः शिनिपुंगवम्
roṣeṇa mahatāviṣṭaḥ śūlamudyamya māriṣacikṣepa bhujavegena jighāṃsuḥ śinipuṃgavam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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