महाभारत 9.20.2
तत्प्रभग्नं बलं दृष्ट्वा कृतवर्मा महारथःदधार समरे शूरः शत्रुसैन्यं महाबलः
tatprabhagnaṃ balaṃ dṛṣṭvā kṛtavarmā mahārathaḥdadhāra samare śūraḥ śatrusainyaṃ mahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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