महाभारत 9.20.34
केकयान्सोमकांश्चैव पाञ्चालांश्चैव मारिषअसंभ्रमं दुराधर्षः शितैरस्त्रैरवारयत्
kekayānsomakāṃścaiva pāñcālāṃścaiva māriṣaasaṃbhramaṃ durādharṣaḥ śitairastrairavārayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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