महाभारत 9.39.26ततः परेण यत्नेन तप्त्वा बहुविधं तपःतेजसा भास्कराकारो गाधिजः समपद्यतtataḥ pareṇa yatnena taptvā bahuvidhaṃ tapaḥtejasā bhāskarākāro gādhijaḥ samapadyataइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें