महाभारत 9.39.29
स लब्ध्वा तपसोग्रेण ब्राह्मणत्वं महायशाःविचचार महीं कृत्स्नां कृतकामः सुरोपमः
sa labdhvā tapasogreṇa brāhmaṇatvaṃ mahāyaśāḥvicacāra mahīṃ kṛtsnāṃ kṛtakāmaḥ suropamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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