महाभारत 9.39.3
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
पुरा कृतयुगे राजन्नार्ष्टिषेणो द्विजोत्तमःवसन्गुरुकुले नित्यं नित्यमध्ययने रतः
purā kṛtayuge rājannārṣṭiṣeṇo dvijottamaḥvasangurukule nityaṃ nityamadhyayane rataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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