महाभारत 9.39.4
तस्य राजन्गुरुकुले वसतो नित्यमेव हसमाप्तिं नागमद्विद्या नापि वेदा विशां पते
tasya rājangurukule vasato nityameva hasamāptiṃ nāgamadvidyā nāpi vedā viśāṃ pate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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