महाभारत 9.39.6
स विद्वान्वेदयुक्तश्च सिद्धश्चाप्यृषिसत्तमःतत्र तीर्थे वरान्प्रादात्त्रीनेव सुमहातपाः
sa vidvānvedayuktaśca siddhaścāpyṛṣisattamaḥtatra tīrthe varānprādāttrīneva sumahātapāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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