महाभारत 9.47.11
इत्युक्तो भगवान्देवः स्मयन्निव निरीक्ष्य ताम्उवाच नियमज्ञां तां सान्त्वयन्निव भारत
ityukto bhagavāndevaḥ smayanniva nirīkṣya tāmuvāca niyamajñāṃ tāṃ sāntvayanniva bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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