महाभारत 9.47.22
पादौ प्रक्षिप्य सा पूर्वं पावके चारुदर्शनादग्धौ दग्धौ पुनः पादावुपावर्तयतानघा
pādau prakṣipya sā pūrvaṃ pāvake cārudarśanādagdhau dagdhau punaḥ pādāvupāvartayatānaghā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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