महाभारत 9.47.36
दिव्या मनोरमाः पुण्याः कथाः शुश्राव सा तदाअतीता सा त्वनावृष्टिर्घोरा द्वादशवार्षिकी
divyā manoramāḥ puṇyāḥ kathāḥ śuśrāva sā tadāatītā sā tvanāvṛṣṭirghorā dvādaśavārṣikī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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