महाभारत 9.47.8उवाच नियमज्ञा च कल्याणी सा प्रियंवदाभगवन्मुनिशार्दूल किमाज्ञापयसि प्रभोuvāca niyamajñā ca kalyāṇī sā priyaṃvadābhagavanmuniśārdūla kimājñāpayasi prabhoइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें