महाभारत 9.47.9
सर्वमद्य यथाशक्ति तव दास्यामि सुव्रतशक्रभक्त्या तु ते पाणिं न दास्यामि कथंचन
sarvamadya yathāśakti tava dāsyāmi suvrataśakrabhaktyā tu te pāṇiṃ na dāsyāmi kathaṃcana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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