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ऋग्वेद 1.1.9
स न॑: पि॒तेव॑ सू॒नवे ऽग्ने॑ सूपाय॒नो भ॑व।सच॑स्वा नः स्व॒स्तये॑॥
sa na: piteva sūnave 'gne sūpāyano bhava |sacasvā naḥ svastaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंस न॑: पि॒तेव॑ सू॒नवे ऽग्ने॑ सूपाय॒नो भ॑व।सच॑स्वा नः स्व॒स्तये॑॥
sa na: piteva sūnave 'gne sūpāyano bhava |sacasvā naḥ svastaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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