ऋग्वेद 1.105.16
अ॒सौ यः पन्था॑ आदि॒त्यो दि॒वि प्र॒वाच्यं॑ कृ॒तः ।न स दे॑वा अति॒क्रमे॒ तं म॑र्तासो॒ न प॑श्यथ वि॒त्तं मे॑ अ॒स्य रो॑दसी॥
asau yaḥ panthā ādityo divi pravācyaṃ kṛtaḥ |na sa devā atikrame taṃ martāso na paśyatha vittaṃ me asya rodasī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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