ऋग्वेद 1.117.9
पु॒रू वर्पां॑स्यश्विना॒ दधा॑ना॒ नि पे॒दव॑ ऊहथुरा॒शुमश्व॑म् ।स॒ह॒स्र॒सां वा॒जिन॒मप्र॑तीतमहि॒हनं॑ श्रव॒स्यं १ तरु॑त्रम्॥
purū varpāṃsyaśvinā dadhānā ni pedava ūhathurāśumaśvam |sahasrasāṃ vājinamapratītamahihanaṃ śravasyaṃ 1 tarutram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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