ऋग्वेद 1.125.6
दक्षि॑णावता॒मिदि॒मानि॑ चि॒त्रा दक्षि॑णावतां दि॒वि सूर्या॑सः ।दक्षि॑णावन्तो अ॒मृतं॑ भजन्ते॒ दक्षि॑णावन्त॒: प्र ति॑रन्त॒ आयु॑:॥
dakṣiṇāvatāmidimāni citrā dakṣiṇāvatāṃ divi sūryāsaḥ |dakṣiṇāvanto amṛtaṃ bhajante dakṣiṇāvanta: pra tiranta āyu: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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