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ऋग्वेद 1.15.11
॥अश्वि॑ना॒ पिब॑तं॒ मधु॒ दीद्य॑ग्नी शुचिव्रता ।ऋ॒तुना॑ यज्ञवाहसा॥
||aśvinā pibataṃ madhu dīdyagnī śucivratā |ṛtunā yajñavāhasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें॥अश्वि॑ना॒ पिब॑तं॒ मधु॒ दीद्य॑ग्नी शुचिव्रता ।ऋ॒तुना॑ यज्ञवाहसा॥
||aśvinā pibataṃ madhu dīdyagnī śucivratā |ṛtunā yajñavāhasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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