Loading
ऋग्वेद 1.15.12
॥गार्ह॑पत्येन सन्त्य ऋ॒तुना॑ यज्ञ॒नीर॑सि ।दे॒वान् दे॑वय॒ते य॑ज॥
||gārhapatyena santya ṛtunā yajñanīrasi |devān devayate yaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें॥गार्ह॑पत्येन सन्त्य ऋ॒तुना॑ यज्ञ॒नीर॑सि ।दे॒वान् दे॑वय॒ते य॑ज॥
||gārhapatyena santya ṛtunā yajñanīrasi |devān devayate yaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें