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ऋग्वेद 1.158.4
उप॑स्तुतिरौच॒थ्यमु॑रुष्ये॒न्मा मामि॒मे प॑त॒त्रिणी॒ वि दु॑ग्धाम् ।मा मामेधो॒ दश॑तयश्चि॒तो धा॒क् प्र यद् वां॑ ब॒द्धस्त्मनि॒ खाद॑ति॒ क्षाम्॥
upastutiraucathyamuruṣyenmā māmime patatriṇī vi dugdhām |mā māmedho daśatayaścito dhāk pra yad vāṃ baddhastmani khādati kṣām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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