ऋग्वेद 1.164.14
सने॑मि च॒क्रम॒जरं॒ वि वा॑वृत उत्ता॒नायां॒ दश॑ यु॒क्ता व॑हन्ति ।सूर्य॑स्य॒ चक्षू॒ रज॑सै॒त्यावृ॑तं॒ तस्मि॒न्नार्पि॑ता॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑॥
sanemi cakramajaraṃ vi vāvṛta uttānāyāṃ daśa yuktā vahanti |sūryasya cakṣū rajasaityāvṛtaṃ tasminnārpitā bhuvanāni viśvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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