ऋग्वेद 1.164.16
स्त्रिय॑: स॒तीस्ताँ उ॑ मे पुं॒स आ॑हु॒: पश्य॑दक्ष॒ण्वान्न वि चे॑तद॒न्धः ।क॒विर्यः पु॒त्रः स ई॒मा चि॑केत॒ यस्ता वि॑जा॒नात् स पि॒तुष्पि॒तास॑त्॥
striya: satīstām̐ u me puṃsa āhu: paśyadakṣaṇvānna vi cetadandhaḥ |kaviryaḥ putraḥ sa īmā ciketa yastā vijānāt sa pituṣpitāsat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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