ऋग्वेद 1.164.20
द्वा सु॑प॒र्णा स॒युजा॒ सखा॑या समा॒नं वृ॒क्षं परि॑ षस्वजाते ।तयो॑र॒न्यः पिप्प॑लं स्वा॒द्वत्त्यन॑श्नन्न॒न्यो अ॒भि चा॑कशीति॥
dvā suparṇā sayujā sakhāyā samānaṃ vṛkṣaṃ pari ṣasvajāte |tayoranyaḥ pippalaṃ svādvattyanaśnannanyo abhi cākaśīti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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