ऋग्वेद 1.168.9
असू॑त॒ पृश्नि॑र्मह॒ते रणा॑य त्वे॒षम॒यासां॑ म॒रुता॒मनी॑कम् ।ते स॑प्स॒रासो॑ऽजनय॒न्ताभ्व॒मादित् स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन्॥
asūta pṛśnirmahate raṇāya tveṣamayāsāṃ marutāmanīkam |te sapsarāso'janayantābhvamādit svadhāmiṣirāṃ paryapaśyan ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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