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ऋग्वेद 1.30.15
आ यद् दुव॑: शतक्रत॒वा कामं॑ जरितॄ॒णाम् ।ऋ॒णोरक्षं॒ न शची॑भिः॥
ā yad duva: śatakratavā kāmaṃ jaritṝṇām |ṛṇorakṣaṃ na śacībhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंआ यद् दुव॑: शतक्रत॒वा कामं॑ जरितॄ॒णाम् ।ऋ॒णोरक्षं॒ न शची॑भिः॥
ā yad duva: śatakratavā kāmaṃ jaritṝṇām |ṛṇorakṣaṃ na śacībhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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