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ऋग्वेद 1.46.15
उ॒भा पि॑बतमश्विनो॒भा न॒: शर्म॑ यच्छतम् ।अ॒वि॒द्रि॒याभि॑रू॒तिभि॑:॥
ubhā pibatamaśvinobhā na: śarma yacchatam |avidriyābhirūtibhi: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंउ॒भा पि॑बतमश्विनो॒भा न॒: शर्म॑ यच्छतम् ।अ॒वि॒द्रि॒याभि॑रू॒तिभि॑:॥
ubhā pibatamaśvinobhā na: śarma yacchatam |avidriyābhirūtibhi: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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