ऋग्वेद 1.48.15
उषो॒ यद॒द्य भा॒नुना॒ वि द्वारा॑वृ॒णवो॑ दि॒वः ।प्र नो॑ यच्छतादवृ॒कं पृ॒थु च्छ॒र्दिः प्र दे॑वि॒ गोम॑ती॒रिष॑:॥
uṣo yadadya bhānunā vi dvārāvṛṇavo divaḥ |pra no yacchatādavṛkaṃ pṛthu cchardiḥ pra devi gomatīriṣa: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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