Loading
ऋग्वेद 1.50.3
अदृ॑श्रमस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ॒ अनु॑ ।भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा॥
adṛśramasya ketavo vi raśmayo janām̐ anu |bhrājanto agnayo yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअदृ॑श्रमस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ॒ अनु॑ ।भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा॥
adṛśramasya ketavo vi raśmayo janām̐ anu |bhrājanto agnayo yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें