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ऋग्वेद 1.50.7
वि द्यामे॑षि॒ रज॑स्पृ॒थ्वहा॒ मिमा॑नो अ॒क्तुभि॑: ।पश्य॒ञ्जन्मा॑नि सूर्य॥
vi dyāmeṣi rajaspṛthvahā mimāno aktubhi: |paśyañjanmāni sūrya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंवि द्यामे॑षि॒ रज॑स्पृ॒थ्वहा॒ मिमा॑नो अ॒क्तुभि॑: ।पश्य॒ञ्जन्मा॑नि सूर्य॥
vi dyāmeṣi rajaspṛthvahā mimāno aktubhi: |paśyañjanmāni sūrya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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