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ऋग्वेद 1.9.3
मत्स्वा॑ सुशिप्र म॒न्दिभि॒: स्तोमे॑भिर्विश्वचर्षणे।सचै॒षु सव॑ने॒ष्वा॥
matsvā suśipra mandibhi: stomebhirviśvacarṣaṇe |sacaiṣu savaneṣvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंमत्स्वा॑ सुशिप्र म॒न्दिभि॒: स्तोमे॑भिर्विश्वचर्षणे।सचै॒षु सव॑ने॒ष्वा॥
matsvā suśipra mandibhi: stomebhirviśvacarṣaṇe |sacaiṣu savaneṣvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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