ऋग्वेद 1.92.15
यु॒क्ष्वा हि वा॑जिनीव॒त्यश्वाँ॑ अ॒द्यारु॒णाँ उ॑षः ।अथा॑ नो॒ विश्वा॒ सौभ॑गा॒न्या व॑ह॥
yukṣvā hi vājinīvatyaśvām̐ adyāruṇām̐ uṣaḥ |athā no viśvā saubhagānyā vaha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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