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ऋग्वेद 10.101.6
इष्कृ॑ताहावमव॒तं सु॑वर॒त्रं सु॑षेच॒नम् ।उ॒द्रिणं॑ सिञ्चे॒ अक्षि॑तम्॥
iṣkṛtāhāvamavataṃ suvaratraṃ suṣecanam |udriṇaṃ siñce akṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंइष्कृ॑ताहावमव॒तं सु॑वर॒त्रं सु॑षेच॒नम् ।उ॒द्रिणं॑ सिञ्चे॒ अक्षि॑तम्॥
iṣkṛtāhāvamavataṃ suvaratraṃ suṣecanam |udriṇaṃ siñce akṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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