ऋग्वेद 10.101.9
आ वो॒ धियं॑ य॒ज्ञियां॑ वर्त ऊ॒तये॒ देवा॑ दे॒वीं य॑ज॒तां य॒ज्ञिया॑मि॒ह ।सा नो॑ दुहीय॒द्यव॑सेव ग॒त्वी स॒हस्र॑धारा॒ पय॑सा म॒ही गौः॥
ā vo dhiyaṃ yajñiyāṃ varta ūtaye devā devīṃ yajatāṃ yajñiyāmiha |sā no duhīyadyavaseva gatvī sahasradhārā payasā mahī gauḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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