ऋग्वेद 10.102.11
प॒रि॒वृ॒क्तेव॑ पति॒विद्य॑मान॒ट् पीप्या॑ना॒ कूच॑क्रेणेव सि॒ञ्चन् ।ए॒षै॒ष्या॑ चिद्र॒थ्या॑ जयेम सुम॒ङ्गलं॒ सिन॑वदस्तु सा॒तम्॥
parivṛkteva patividyamānaṭ pīpyānā kūcakreṇeva siñcan |eṣaiṣyā cidrathyā jayema sumaṅgalaṃ sinavadastu sātam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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