ऋग्वेद 10.105.6
प्रास्तौ॑दृ॒ष्वौजा॑ ऋ॒ष्वेभि॑स्त॒तक्ष॒ शूर॒: शव॑सा ।ऋ॒भुर्न क्रतु॑भिर्मात॒रिश्वा॑॥
prāstaudṛṣvaujā ṛṣvebhistatakṣa śūra: śavasā |ṛbhurna kratubhirmātariśvā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें