ऋग्वेद 10.105.9
ऊ॒र्ध्वा यत्ते॑ त्रे॒तिनी॒ भूद्य॒ज्ञस्य॑ धू॒र्षु सद्म॑न् ।स॒जूर्नावं॒ स्वय॑शसं॒ सचा॒योः॥
ūrdhvā yatte tretinī bhūdyajñasya dhūrṣu sadman |sajūrnāvaṃ svayaśasaṃ sacāyoḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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