ऋग्वेद 10.108.9
ए॒वा च॒ त्वं स॑रम आज॒गन्थ॒ प्रबा॑धिता॒ सह॑सा॒ दैव्ये॑न ।स्वसा॑रं त्वा कृणवै॒ मा पुन॑र्गा॒ अप॑ ते॒ गवां॑ सुभगे भजाम॥
evā ca tvaṃ sarama ājagantha prabādhitā sahasā daivyena |svasāraṃ tvā kṛṇavai mā punargā apa te gavāṃ subhage bhajāma ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें