ऋग्वेद 10.109.6
पुन॒र्वै दे॒वा अ॑ददु॒: पुन॑र्मनु॒ष्या॑ उ॒त ।राजा॑नः स॒त्यं कृ॑ण्वा॒ना ब्र॑ह्मजा॒यां पुन॑र्ददुः॥
punarvai devā adadu: punarmanuṣyā uta |rājānaḥ satyaṃ kṛṇvānā brahmajāyāṃ punardaduḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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