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ऋग्वेद 10.119.10
ओ॒षमित्पृ॑थि॒वीम॒हं ज॒ङ्घना॑नी॒ह वे॒ह वा॑ ।कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑॥
oṣamitpṛthivīmahaṃ jaṅghanānīha veha vā |kuvitsomasyāpāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंओ॒षमित्पृ॑थि॒वीम॒हं ज॒ङ्घना॑नी॒ह वे॒ह वा॑ ।कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑॥
oṣamitpṛthivīmahaṃ jaṅghanānīha veha vā |kuvitsomasyāpāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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