Loading
ऋग्वेद 10.119.13
गृ॒हो या॒म्यरं॑कृतो दे॒वेभ्यो॑ हव्य॒वाह॑नः ।कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑॥
gṛho yāmyaraṃkṛto devebhyo havyavāhanaḥ |kuvitsomasyāpāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंगृ॒हो या॒म्यरं॑कृतो दे॒वेभ्यो॑ हव्य॒वाह॑नः ।कु॒वित्सोम॒स्यापा॒मिति॑॥
gṛho yāmyaraṃkṛto devebhyo havyavāhanaḥ |kuvitsomasyāpāmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें