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ऋग्वेद 10.12.9
श्रु॒धी नो॑ अग्ने॒ सद॑ने स॒धस्थे॑ यु॒क्ष्वा रथ॑म॒मृत॑स्य द्रवि॒त्नुम् ।आ नो॑ वह॒ रोद॑सी दे॒वपु॑त्रे॒ माकि॑र्दे॒वाना॒मप॑ भूरि॒ह स्या॑:॥
śrudhī no agne sadane sadhasthe yukṣvā rathamamṛtasya dravitnum |ā no vaha rodasī devaputre mākirdevānāmapa bhūriha syā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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