ऋग्वेद 10.122.6
त्वामिद॒स्या उ॒षसो॒ व्यु॑ष्टिषु दू॒तं कृ॑ण्वा॒ना अ॑यजन्त॒ मानु॑षाः ।त्वां दे॒वा म॑ह॒याय्या॑य वावृधु॒राज्य॑मग्ने निमृ॒जन्तो॑ अध्व॒रे॥
tvāmidasyā uṣaso vyuṣṭiṣu dūtaṃ kṛṇvānā ayajanta mānuṣāḥ |tvāṃ devā mahayāyyāya vāvṛdhurājyamagne nimṛjanto adhvare ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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